केरल सरकार के शिक्षा विभाग ने स्कूल बैग का वज़न कम करने के उपायों पर पेश की गई एक ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंज़ूरी दे दी है. इसके अलावा राज्य सरकार की पाठ्यक्रम संचालन समिति ने अगले अकादमिक वर्ष से बैकबेंचर्स की अवधारणा को खत्म करने के लिए कदम उठाने का भी फैसला किया है.
शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने एक बयान में कहा है कि स्कूल बैग (School Bag) का वज़न कम करने और ‘Backbenchers’ के बिना क्लासरूम बनाने का प्रस्ताव देने वाली एक ड्राफ्ट रिपोर्ट को राज्य पाठ्यक्रम संचालन समिति (State Curriculum Steering Committee) ने मंज़ूरी दे दी है.
उनके अनुसार, इन प्रस्तावों का मकसद बच्चों के स्कूल ले जाने वाले बैग का वज़न कम करके उनकी खुशी सुनिश्चित करना और क्लासरूम के ‘लोकतांत्रिकरण’ के हिस्से के तौर पर ‘बैकबेंचर्स’ के बिना सीखने का माहौल बनाना है.
स्कूलों को लोकतांत्रिक बनाना
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शिवनकुट्टी ने कहा, ‘हम स्कूलों को ज़्यादा चाइल्ड-फ्रेंडली और लोकतांत्रिक बनाना चाहते हैं, इसलिए स्कूल बैग का वज़न कम करने का सुझाव दिया गया है. छात्रों के फिटनेस को ध्यान में रखते हुए वज़न को वैज्ञानिक तरीके से कम करने के लिए कदम उठाए जाएंगे. इसके अलावा यह पक्का करने के लिए कि सभी छात्रों पर बराबर ध्यान दिया जाए और क्लास में एक लोकतांत्रिक पढ़ाई का माहौल बना रहे, क्लासरूम में पीछे की बेंच हटा दी जाएंगी.’
मंत्री ने आगे कहा कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) को इन प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने का काम सौंपा गया था और उसके द्वारा तैयार की गई ड्राफ्ट रिपोर्ट को समिति ने मंज़ूरी दे दी है.
शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने बयान में कहा कि शिक्षा प्रक्रिया में पूरे समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ड्राफ्ट रिपोर्ट पर जनता की राय आमंत्रित करने का फैसला किया गया है.
जनता की राय मांगी
उन्होंने कहा कि इसके लिए रिपोर्ट SCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी और शिक्षक, माता-पिता, छात्र और आम जनता 20 जनवरी तक इस मुद्दे पर अपने टिप्पणी और सुझाव दे सकते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि सामान्य शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि जनता से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए आने वाले अकादमिक वर्ष में स्कूलों में इन बदलावों को लागू किया जाए. मंत्री ने कहा, ‘ये बदलाव हमारे स्कूलों को ज़्यादा बच्चों के अनुकूल और लोकतांत्रिक बनाने में मदद करेंगे.’
बैठने Horseshoe की व्यवस्था
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले से ही केरल के कुछ स्कूलों ने अपनी कक्षाओं में बैठने के लिए ‘हॉर्सशू’ व्यवस्था अपनाने का फैसला किया है. कन्नूर, त्रिशूर और कोल्लम जिलों के कुछ स्कूलों ने बैठने के लिए हॉर्सशू या सेमी-सर्कल व्यवस्था शुरू की है.
इस व्यवस्था में छात्र कक्षा के किनारे पर एक-दूसरे के सामने बैठे होते हैं. शिक्षक भी कमरे में घूमते हुए इस तरह बैठे सभी छात्रों के साथ आमने-सामने बात कर पाते हैं. यह कक्षा में बैठने की उस व्यवस्था से अलग है, जिसमें कक्षा में शिक्षक आगे खड़े होते हैं और छात्र एक के बाद एक लाइन में लगे बेंच पर बैठे होते हैं.




