Special Intensive Revision (SIR): चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं.
SIR के दूसरे चरण, जो 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था, से पहले इन 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 50.9 करोड़ मतदाता थे. अलग-अलग ड्राफ्ट लिस्ट प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 44.4 करोड़ रह गई.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट (Draft Voter List) से हटाए गए लोगों के नाम ‘ASD’ या अनुपस्थित (Absent), कहीं और चले गए (Shifted) और मृत/डुप्लीकेट (Dead/Duplicate) कैटेगरी में डाले गए हैं.
यूपी से 2.89 करोड़ नाम हटे
अधिकारियों ने पहले उपलब्ध चलन का हवाला देते हुए कहा था कि SIR प्रक्रिया में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में गणना प्रपत्र (Enumeration Form) का कलेक्शन ‘बहुत कम’ रहा है.
SIR प्रक्रिया के बाद बीते मंगलवार (6 जनवरी) को प्रकाशित हुई उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.89 करोड़ मतदाताओं को हटा दिया गया और 12.55 करोड़ मतदाताओं को रखा गया है.
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पहले से सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं यानी 18.7% को, मौत, परमानेंट माइग्रेशन या कई रजिस्ट्रेशन की वजह से ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सका.
आखिरी SIR कट-ऑफ डेट
SIR का दूसरा फेज 4 नवंबर 2025 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुदुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ था. असम में मतदाता सूची का एक अलग ‘स्पेशल रिवीजन’ चल रहा है.
राज्यों में आखिरी SIR को कट-ऑफ डेट माना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे चुनाव आयोग ने इंटेंसिव रिवीजन के लिए बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया था. ज़्यादातर राज्यों में वोटर लिस्ट का आखिरी SIR 2002 और 2004 के बीच था.
यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार सहित ‘अवैध प्रवासियों’ पर विभिन्न राज्यों में हो रही कार्रवाई के मद्देनज़र महत्वपूर्ण है.
उत्तर प्रदेश का हाल
उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा होने के बाद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) की कार्यालय की ओर से बताया गया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में लखनऊ में सबसे ज़्यादा 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 को शहर में 39,94,535 मतदाता थे, जबकि 5 जनवरी को इनकी संख्या घटकर 27,94,397 हो गई. गाजियाबाद में सबसे ज़्यादा नाम हटाए गए, जहां 27 अक्टूबर को 28,37,991 मतदाता थे और 5 जनवरी को यह संख्या घटकर 20,19,852 रह गई.
18.70 प्रतिशत नाम हटाए गए
बीते 6 जनवरी को रिणवा ने कहा कि राज्य में SIR के तहत मतदाताओं की गिनती के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची से 18.70 प्रतिशत नाम हटा दिए गए. समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए रिणवा ने कहा, ‘SIR के लिए गिनती का चरण पूरा होने के बाद उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. हमारे पास अब 12,55,56,025 मतदाता हैं. मतदाताओं की गिनती का चरण 4 नवंबर को शुरू हुआ और 26 दिसंबर 2025 तक चला. हमारे ब्लाक लेवल अधिकारी (BLO) हर घर गए और मतदाताओं को उनका गणना प्रपत्र दिया.’
उन्होंने कहा, ‘इस प्रपत्र पर साइन करवाने के बाद उन्होंने गणना प्रपत्र फिर से इकट्ठा किया. यह पाया गया कि 2 करोड़ 28 लाख 76 हज़ार से ज़्यादा लोग या तो मृत पाए गए या जिनके नाम मतदाता सूची में एक से ज़्यादा बार थे. यह भी पाया गया कि कई लोग उस पते से चले गए थे जहां से उन्होंने अपनी वोटर आईडी बनवाई थी.’
दावे और आपत्तियां
SIR से संबंधित आदेश के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित कर दी गई है. बूथ-वाइज प्रिंट और डिजिटल कॉपी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को दे दी गई हैं और मुख्य चुनाव अधिकारी की वेबसाइट (ceouttarpradesh.nic.in) पर भी उपलब्ध करा दी गई हैं.
दावे और आपत्तियों का समय 6 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक तय किया गया है. कोई भी मौजूदा या संभावित मतदाता योग्य मतदाताओं को शामिल करने या अयोग्य नामों को हटाने के लिए दावे या आपत्तियां दर्ज कर सकता है.
कुल 403 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और 2042 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी 27 फरवरी 2026 तक ऐसे मामलों की जांच करने के लिए तैनात हैं. इसके अलावा निर्धारित समय सीमा के भीतर दावों और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए ज़रूरत के हिसाब से अतिरिक्त सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी भी नामित किए गए हैं.




