अरुणाचल जलविद्युत परियोजना के लिए काटे जाएंगे 23 लाख से अधिक पेड़, मुआवज़े के तौर पर मध्य प्रदेश में होगा पौधरोपण

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: PIB)

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक विशेषज्ञ समिति ने अरुणाचल प्रदेश में NHPC के 1,720 मेगावॉट कमला जलविद्युत परियोजना के निर्माण को मंज़ूरी देने की सिफारिश की है. इस परियोजना निर्माण के कारण इलाके के लगभग 23.4 लाख पेड़ काटे जाएंगे.

पेड़ों की प्रस्तावित कटाई पर चिंता जताते हुए समिति ने पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को ठीक करने के लिए एक सटीक और अच्छी तरह से मैनेज किए गए एक्शन प्लान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.

अरुणाचल प्रदेश वन विभाग की तरफ से समिति को दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए मुआवज़े के तौर पर पेड़ लगाने का काम मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किया जाएगा, क्योंकि अरुणाचल प्रदेश में खराब जंगल की कोई ज़मीन मौजूद नहीं थी.

23,764.01 करोड़ रुपये की परियोजना

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 23,764.01 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत 216 मीटर ऊंचा बांध और 2,600 हेक्टेयर के जलाशय का निर्माण किया जाएगा. इसका मकसद कमला नदी के पानी का इस्तेमाल करना है, जो सुबनसिरी नदी (Subansiri River) के दाहिने किनारे की एक सहायक नदी है.

नदी घाटी और जलविद्युत परियोजना पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) की 28 जनवरी और 30 जनवरी की बैठकों के विवरण से पता चलता है कि समिति ने परियोजना प्रस्तावक NHPC Ltd को अंतिम पर्यावरण मंजूरी मिलने से पहले सैद्धांतिक वन मंज़ूरी लेने का निर्देश दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को देखने के बाद पर्यावरण मंत्रालय अंतिम पर्यावरण मंजूरी देता है.

पेड़ काटने की अनुमति

मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) परियोजना के लिए 3,278 हेक्टेयर ज़मीन के परिवर्तन के प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगी. जंगल की ज़मीन पर पेड़ काटने की अनुमति सिर्फ़ दो चरणों में वन परिवर्तन स्वीकृतियों के बाद ही दी जाती है, और यह काम अलग-अलग फेज़ में होता है.

विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने अपनी दो बैठकों के मिनट्स में लिखा, ‘समिति ने पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव पर चिंता जताई, यानी 23 लाख 40 हजार 213 पेड़, क्योंकि यह परियोजना बहुत घने जंगल वाले इलाके में है. समिति ने पारिस्थितिकी तंत्र को ठीक करने के लिए एक सटीक और अच्छी तरह से मैनेज किए गए एक्शन प्लान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिसमें राज्य वन एवं वन्यजीव विभाग, पारिस्थितिकी और वन्यजीव, स्थानीय विशेषज्ञ लोगों से सलाह करके ज़रूरी नुकसान कम करने और मुआवज़े के उपाय शामिल हों.’

समिति के अनुसार, परियोजना को वन मंज़ूरी देने से पहले इस पर विचार करना ज़रूरी होगा.

पेड़ लगाने का काम लंबित

कमला जलविद्युत परियोजना, सुबनसिरी नदी घाटी में योजनाबद्ध किए गए जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है. असम-अरुणाचल बॉर्डर पर गेरुकामुख में 2,000 मेगावॉट की निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना, सुबनसिरी नदी के मुख्य हिस्से और कमला परियोजना के नीचे स्थित है.

इंडियन एक्सप्रेस ने बीते 4 फरवरी को रिपोर्ट किया था कि निचली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना में कई बार देरी के बाद दिसंबर 2025 में चालू हुई थी, लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के छह रिमाइंडर के बावजूद 31.83 वर्ग किमी. पर ज़रूरी मुआवज़े के तौर पर पेड़ लगाने का काम अभी भी लंबित है.


5,440 परिवार होंगे प्रभावित

23,764.01 करोड़ रुपये की इस जलविद्युत परियोजना का मकसद कमला नदी के पानी का इस्तेमाल करना है. कमला नदी सुबनसिरी नदी की दाहिनी तरफ की एक सहायक नदी है, वहीं सुबनसिरी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है. इस नदी पर 216 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया जाएगा.

यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के कामले, क्रा दादी और कुरुंग कुमे जिलों में फैला है. इसे बाढ़ के प्रबंधन के लिए एक स्टोरेज परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है. परियोजना की सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना से 126 गांवों के कुल 5,440 परिवार प्रभावित होंगे.


वन्यजीव मंजूरी पर चुप्पी

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश करते समय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति इस बारे में चुप नज़र आई कि परियोजना के लिए कानूनी वन्यजीव मंजूरी की ज़रूरत होगी या नहीं.

विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की 28 जनवरी की बैठक से पहले असम के पर्यावरणविद बिमल गोगोई ने बताया था कि 2009 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर निचले सुबनसिरी के ऊपर की किसी भी परियोजना पर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को विचार करना होगा. समिति की बैठक के मिनट्स में वन्यजीव मंजूरी के लिए मूल्यांकन से जुड़ी शर्तों का कोई ज़िक्र नहीं है.

155 पौधों की प्रजातियां

परिवर्तन के लिए प्रस्तावित 3,278 हेक्टेयर जंगल, जो बहुत ज़्यादा संरक्षण मूल्य वाला है, उसमें से 439 हेक्टेयर को बहुत घना जंगल और 1,119 हेक्टेयर को मध्यम घना जंगल माना गया है. सभी मौसमों में फील्ड सर्वे से इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में 69 पादप परिवारों से जुड़ीं कुल 155 पौधों की प्रजातियां देखी और रिकॉर्ड की गई हैं.

परियोजना की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रजातियों में पेड़, झाड़ियां, जड़ी-बूटियां, घास, चढ़ने वाले पौधे और फर्न शामिल हैं. इस परियोजना के तहत काटे जाने वाले 23 लाख से अधिक पेड़ों की जगह मुआवजे के तौर पर मध्य प्रदेश के खरगोन, ग्वालियर, धार, पन्ना और दूसरे ज़िलों में पौधरोपण करने का प्रस्ताव है.

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