इस साल रोशनी के महापर्व दीपावली के समय उत्तर प्रदेश के तमाम बच्चों की जिंदगी में अंधेरा छा गया. प्रदेश में प्लास्टिक की बनी कार्बाइड गन से 65 बच्चों की रोशनी चली जाने का मामला सामने आया है.
अमर उजाला अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये गन यूट्यूब देखकर प्लास्टिक के पाइप से बनाई गई थी और दीपावली के त्योहार के दौरान उत्तर प्रदेश में बच्चों ने इसका जमकर इस्तेमाल किया था.
इस गन से आंखें जख्मी हुईं तो पूर्वांचल और बिहार से बच्चों को बीएचयू और बनारस के बाकी अस्पतालों में इलाज के लिए लाया गया. इनमें से 30 से ज्यादा बच्चों की उम्र 5 से 14 साल है.
2 महीने से चल रहा इलाज
प्लास्टिक के इस गन के चलते इन बच्चों के आंखों की काली पुतली आपस में चिपक गई. इन बच्चों का दो महीने से इलाज चल रहा है. कुछ बच्चों की सर्जरी बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में जनवरी के दूसरे हफ्ते में होनी है.
बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी मौर्य ने बताया कि दीपावली के एक सप्ताह पहले और उसके 15 दिन बाद तक ऐसे मामले आए. पिछले डेढ़ महीने में पटाखे जलाने से आंख में चोट लगने वाले करीब 40 बच्चों और युवाओं का इलाज किया गया. इनमें 22 केवल प्लास्टिक के गन से चोटिल हुए थे. पूर्वांचल के साथ ही कुछ बच्चे बिहार के अलग-अलग जिलों से आए थे.

काली पुतली चिपक गई
बीएचयू में ही बाकी नेत्र रोग के डॉक्टरों के पास भी 18 ऐसे मरीज पहुंचे हैं. बीएचयू के ही प्रो. प्रशांत भूषण और डॉ दीपक मिश्रा ने अलग-अलग दिनों में चली ओपीडी में करीब 10 से ज्यादा बच्चों को देखा है. जांच कराई तो पता चला कि बच्चों के आंखों की काली पुतली ही चिपक गई थी.
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग टंडन ने दिसंबर में आजमगढ़ के छह साल के बच्चे की सर्जरी की है. अक्टूबर से अब तक तीन ऐसी सर्जरी वे कर चुके हैं.
नेत्र प्रत्यारोपण एक विकल्प
डॉ. टंडन के मुताबिक, कार्बाइड के कण चले जाने से आंख की काली पुतली खराब हो गई थी. काली पुतली एक पारदर्शी झिल्ली होती है. उसके खराब होने से आंखों की रोशनी चली जाती है. इसके ठीक होने की संभावना बहुत ही कम होती है. ऐसे मामले में नेत्र प्रत्यारोपण ही एक विकल्प होता है.
रिपोर्ट के अनुसार, नेत्र चिकित्सकों की संस्था भारतीय नेत्र संगठन (इंडियन आप्थोलोमाजिकल सोसाइटी) की ओर से देश के 20 डॉक्टरों की टीम गठित की गई है। डॉक्टर कार्बाइड गन के प्रयोग से लगने वाली चोट आदि का अध्ययन कर रहे हैं.




