Student Protest in Maulana Azad National Urdu University: कांग्रेस के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार द्वारा हैदराबाद स्थित मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) में 50 एकड़ ज़मीन वापस लेने के लिए जारी किए गए नोटिस से छात्रों का ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है और राज्य में राजनीतिक तूफान आ गया है.
MANUU स्टूडेंट्स कलेक्टिव के तहत आने वाले छात्र प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह ज़मीन विश्वविद्यालय की है और इसके भविष्य के विस्तार के लिए बहुत ज़रूरी है.
सरकार पर जन शिक्षा को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि ज़मीन वापस लेने से उनकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर सीधा असर पड़ेगा. उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत नोटिस वापस ले.
आवंटन की शर्तों का उल्लंघन
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले राज्य के राजस्व विभाग ने विश्वविद्यालय से पूछा था कि 1998 में उसे आवंटित की गई 200 एकड़ ज़मीन में से 50 एकड़ ज़मीन सरकार वापस क्यों न ले ले.
नोटिस में रंगारेड्डी ज़िले के कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने आवंटन की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा कि जबकि 150 एकड़ ज़मीन विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल हो रही है, बाकी 50 एकड़ ज़मीन खाली और बिना इस्तेमाल के पड़ी है.
केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता बंदी संजय ने विरोध कर रहे छात्रों का समर्थन किया और राज्य सरकार के नोटिस की आलोचना की. संजय ने सवाल किया कि क्या सरकार विश्वविद्यालय की ज़मीन बेचने की योजना बना रही है.
Congress Govt targeting land meant for students’ future is shameful.
Government Notices to Maulana Azad National Urdu University in Hyderabad questioning land usage is unacceptable.
• Is this first step to sell off university land worth thousands of crores?
• A government… pic.twitter.com/rzkyEURJt7— Bandi Sanjay Kumar (@bandisanjay_bjp) January 7, 2026
ज़मीन ज़ब्त करने का अधिकार नहीं
संजय ने आगे कहा, ‘जो सरकार शिक्षण संस्थानों को बुनियादी सुविधाएं नहीं दे सकती, उसे उनकी ज़मीन ज़ब्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.’ उन्होंने सरकार को सलाह दी कि वह शिक्षण संस्थानों से दूर रहे, नहीं तो छात्रों और जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा.
विधानसभा में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने भी यह मुद्दा उठाया और बताया कि इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) समेत दूसरे संस्थानों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए हैं.
छात्र हितों की अनदेखी
उन्होंने इस स्थिति की तुलना पहले हुए हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) ज़मीन विवाद से की और सरकार से इस मामले में स्थिति साफ करने की मांग की.
Hello @RahulGandhi Ji,
Are you even aware of what your government is doing in Telangana? Is this your idea of standing for education and minorities?
After the disgrace at HCU, where your CM bulldozed a green forest and crushed wildlife, bringing national shame to your party,… pic.twitter.com/rTzl6VpfOX
— KTR (@KTRBRS) January 6, 2026
इससे पहले भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव, जिन्हें KTR के नाम से जाना जाता है, ने सरकार की आलोचना की थी. X पर एक पोस्ट में KTR ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को टैग किया और पूछा कि क्या उन्हें तेलंगाना में हो रहे घटनाक्रमों की जानकारी है.
कंचा गाचीबोवली मुद्दे का ज़िक्र करते हुए KTR ने कांग्रेस पर मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के साथ भी वही गलती दोहराने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि विवादित 50 एकड़ ज़मीन भविष्य के एकेडमिक ब्लॉक, हॉस्टल और नए कोर्स के लिए आरक्षित थी. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के हितों को नज़रअंदाज़ कर रही है.




