दिल्ली में साल 2024 में सांस की बीमारियों से 9,000 से ज़्यादा लोगों की मौत

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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Deaths Due To Respiratory Diseases: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2024 में सांस की बीमारियों से 9,211 मौतें हुईं, जो 2023 में 8,801 थीं. पिछले कुछ सालों से सांस की बीमारियों से मौत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

सांस की आम बीमारियों में अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और टीबी शामिल हैं, जिनसे अक्सर सांस लेने में दिक्कत होती है.

दिल्ली सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में कुल मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी देखी गई. साल 2024 में दिल्ली में कुल मौतों की संख्या बढ़कर 1,39,480 हो गई, जबकि पिछले साल 1,32,391 मौतें दर्ज की गई थीं. इनमें से 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं और 38 अन्य जेंडर के थे. इनमें से 90,883 मौतों को मेडिकल तौर पर सर्टिफाइड किया गया था.

सर्कुलेटरी बीमारियां

साल 2024 में सर्कुलेटरी बीमारियां (Circulatory Diseases) मौत का सबसे बड़ा कारण पाई गईं, इसके बाद संक्रामक (Infectious Diseases) और पैरासाइट (परजीवी/Parasitic Diseases) से होने वाली बीमारियां थीं.

सर्कुलेटरी बीमारियां या कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां (CVDs), ऐसी स्थितियां हैं, जो दिल और खून की नसों को प्रभावित करती हैं, जो अक्सर प्लाक जमने (Atherosclerosis) के कारण होती हैं, जिससे धमनियां सिकुड़ जाती हैं, अंगों तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) और हार्ट फेलियर हो सकता है, जिसके रिस्क फैक्टर्स में हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, डायबिटीज और मोटापा शामिल हैं.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 21,262 मौतें सर्कुलेटरी बीमारी के कारण हुईं – आम प्रकारों में बंद धमनी, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर शामिल हैं. 2023 में यह संख्या 15,714 थी.

संक्रामक बीमारियां

राष्ट्रीय राजधानी में मौत का दूसरा सबसे आम कारण 16,060 मामलों के साथ संक्रामक और पैरासाइट से होने वाली बीमारियां थीं, जो आमतौर पर बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से फैलती हैं, अक्सर दूषित खाने और पानी से. इस तरह की मौतों में पिछले साल के मुकाबले कमी आई, जो 20,781 दर्ज की गई थी.

राष्ट्रीय राजधानी में शिशु मृत्यु दर (IMR) में थोड़ा सुधार हुआ है, जो 1000 जीवित जन्मों पर 22.4 दर्ज की गई, जबकि 2023 में यह 23.61 थी. शिशु मृत्यु दर एक साल से कम उम्र के शिशुओं की मौतों का एक पैमाना है.

जन्म दर

दस्तावेज़ों में बताया गया है कि साल 2024 में शहर में कुल 3,06,459 जीवित जन्म दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 8,628 कम थे.

आंकड़ों से पता चला है कि 2024 में जन्म दर 14 दर्ज की गई, जो 2023 में 14.66 से कम है, जबकि मृत्यु दर 2023 में 6.16 से बढ़कर 2024 में 6.37 हो गई है. जन्म और मृत्यु दर किसी खास जगह के प्रति 1,000 लोगों पर गिनी जाती है.

अनुमान है कि अगले 10 सालों में यानी साल 2036 तक दिल्ली की आबादी बढ़कर 2.65 करोड़ हो जाएगी. आंकड़ों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 99.1 प्रतिशत लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र है.

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