केदारनाथ में लगा कचरे का अंबार, साल 2025 में कूड़े की मात्रा में आया 22 प्रतिशत का उछाल: RTI

केदारनाथ धाम हिंदुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक/केदारनाथ.धाम)

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Kedarnath Choked By Trash: बर्फ से ढके हिमालय की गोद में बसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक केदारनाथ के सामने एक भयावह संकट मंडरा रहा है. यह संकट हर साल इस पावन स्थल पर जमा हो रहा कचरा है.

साल 2025 के यात्रा सीज़न के दौरान केदारनाथ मंदिर में 21.4 मीट्रिक टन ठोस कचरा पैदा हुआ, जो पिछले साल से 22% ज़्यादा है. इसका लगभग 60% बगैर प्रॉसेस (प्रसंस्करण – यानी कचरे का निपटान) किए बस फेंक दिया गया, जिससे इस UNESCO-मान्यता प्राप्त तीर्थस्थल के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है.

समाचार वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के आंकड़ों को देखने पर साफ पता चलता है कि मई में केदारनाथ धाम में 4.8 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ, जो यात्रा की शुरुआती भीड़ की वजह से था.

कितना कचरा हुआ?

इसके बाद जून में गर्मी की छुट्टियों के दौरान कचरे की मात्रा बढ़कर 5.6 मीट्रिक टन पहुंच गई. इसके बाद के महीने में इस तीर्थस्थल पर कचरा जमा होने की मात्रा में कमी देखी गई. जैसे जुलाई 2025 में 3.6 मीट्रिक टन, अगस्त में 1.1 मीट्रिक टन, सितंबर में 1.2 मीट्रिक टन और अक्टूबर में 1.5 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ.

सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत पर्यावरणविद अमित गुप्ता की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब में नगर पंचायत केदारनाथ ने जो आंकड़े साझा किए हैं, उससे आधारभूत ढांचे में निवेश के बावजूद कचरा प्रबंधन (Waste Management) में प्रशासनिक नाकामी की एक गंभीर तस्वीर सामने आती है.

12.7 मीट्रिक टन कचरे का ढेर

मई और अक्टूबर 2025 के बीच पैदा हुए 21.4 मीट्रिक टन कचरे में से सिर्फ 8.7 मीट्रिक टन (लगभग 40 प्रतिशत) ही प्रॉसेस किया गया, जिससे बेस कैंप के पास लैंडफिल या खुले डंप यार्ड में 12.7 मीट्रिक टन का बड़ा कचरे का ढेर लग गया.

यह पिछले पांच सालों में सबसे ज़्यादा कचरा है, जो दिखाता है कि इस तीर्थस्थल की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद यहां के पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) पर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, सीज़न के आखिर तक बिना प्रॉसेस किया हुआ कचरे का ढेर बढ़कर करीब 2,500 बड़े हाथियों के वज़न के बराबर हो गया था. मज़े की बात यह है कि यह बढ़ोतरी तब हुई जब हाल ही में 5 टन प्रतिदिन (TPD) मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF – जहां कचरे को प्रॉसेस किया जाता है) चालू हुई थी.

कचरा प्रबंधन

इस फैसिलिटी को गेम-चेंजर बताया जा रहा था, लेकिन कचरा निपटान की दर में मामूली सुधार हुआ, इसके लिए अधिकारियों ने ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला दिया.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक/केदारनाथ.धाम)

इस बीच गीले कचरे को फेंकने वाली मशीनों के लिए 3.13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव अभी भी मंज़ूरी के लिए लंबित है, जिससे केदारनाथ धाम बुनियादी लैंडफिल (Landfill) पर निर्भर है, जिसमें बेस कैंप के पास एक नया 1,500-फुट क्षमता वाला डंप यार्ड (कचरा जमा करने का स्थान) भी शामिल है.

केदारनाथ – एक प्रमुख तीर्थस्थल

उत्तराखंड (Uttarakhand) के गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalaya) में 3,583 मीटर की ऊंचाई पर बसा केदारनाथ, पवित्र चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) का एक अहम हिस्सा है. हाल के सालों में बेहतर सड़कों, हेलीकॉप्टर सेवा और पर्यटन को बढ़ावा देने की वजह से यह दूरदराज की जगह एक लो​कप्रिय केंद्र बन गई है.

इस तेज़ी को नकारा नहीं जा सकता. साल 2024 में चार धाम परिपथ ने 48 लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों का स्वागत किया. 2025 तक यात्रा ने सिर्फ पहले 48 दिनों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में 300 करोड़ रुपये का इजाफा किया. इसमें हेलीकॉप्टर सेवा (11 करोड़ रुपये) और खच्चर ट्रांसपोर्ट (60 करोड़ रुपये) से अच्छी-खासी कमाई शामिल थी.

पर्यावरण को खतरा

हालांकि, यह आर्थिक फायदा दोधारी तलवार है. केदारनाथ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem), जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और प्रदूषण (Pollution) के लिहाज़ से बहुत ज़्यादा कमज़ोर है; कचरा – खासकर प्लास्टिक और खाने के बचे हुए टुकड़े – अब मंदाकिनी नदी (Mandakini River) में मिल रहे हैं, जिससे निचले इलाकों की तरफ गंदगी फैलने का खतरा है.

पर्यावरण के नज़रिये से देखें तो यह संकट चिंताजनक है. बिना प्रॉसेस किया गया कचरा भूस्खलन (Landslide) को बढ़ावा देता है, पानी के स्रोत को गंदा करता है और इस जैव विवि​धता (Biodiversity) वाले प्रमुख केंद्र में जंगली जानवरों को खतरे में डालता है.

तय सीमा से अधिक यात्री

नवंबर 2025 में पूरा हुआ अपनी तरह का पहला वहन क्षमता सर्वे हर दिन 13,111 तीर्थयात्रियों की सीमा तय करने की सलाह देता है, यह सीमा अभी सामान्य तौर पर तोड़ी जा रही है.

सरकारी नज़रिये में तरक्की पर ज़ोर दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि 2025 की शुरुआत में कूड़ा फेंकने पर 4.17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह बहुत कम है, बहुत देर हो चुकी है.

साल के आखिर तक चार धाम के लिए तीर्थयात्रियों की संख्या 60 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, इसलिए ज़रूरी इको-फ्रेंडली बैग और डिजिटल भीड़ प्रबंधन जैसे टिकाऊ तरीके अपनाने ज़रूरी हैं. जैसे-जैसे 2026 की यात्रा नज़दीक आ रही है, सवाल बना हुआ है कि क्या भक्ति केदारनाथ के पर्यावरण संरक्षण के साथ जुड़ पाएगी?

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