मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के कई टाइगर रिज़र्व में खनन और रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्टैंडिंग कमेटी ने मध्य प्रदेश के अलग-अलग टाइगर रिज़र्व में तीन परियोजनाओं को मंज़ूरी दे दी है. ये अभयारण्य पन्ना टाइगर रिजर्व, संजय दुबरी टाइगर रिज़र्व और रातापानी टाइगर रिज़र्व हैं. इसके अलावा समिति ने उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर ज़ोन में एक रोपवे निर्माण परियोजना को भी मंज़ूरी दी है.

बीते 9 दिसंबर को अपनी आखिरी बैठक के मिनट्स के अनुसार, ​समिति ने सतना क्षेत्रीय वन में चूना पत्थर की खदान के लिए मंजूरी की सिफारिश की. परियोजना के प्रस्ताव के अनुसार, पन्ना टाइगर रिजर्व की बाघ संरक्षण योजना के तहत स्वीकृत वन्यजीव गलियारे wildlife corridor के भीतर और नजदीक 266.302 हेक्टेयर राजस्व भूमि पट्टे का उपयोग किया जाएगा. यह गलियारा पन्ना, बांधवगढ़ और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व के बाघों के रहने के स्थान को जोड़ता है.

छत्तीसगढ़ में बॉक्साइट खनन को मंजूरी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के दो अन्य बाघ अभयारण्यों – संजय दुबरी और रातापानी – में समिति ने भूमिगत जल पाइपलाइन और बारना बांध के घटकों के निर्माण को मंजूरी दे दी है. इस बीच उत्तराखंड के ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक रोपवे बनाने के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र की 4.54 हेक्टेयर भूमि के उपयोग को मंजूरी दे दी गई है.

इसके अलावा समिति ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में फेन वन्यजीव अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में स्थित दो बॉक्साइट खनन परियोजनाओं को मंजूरी देने की भी सिफारिश की.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि यद्यपि खनन पट्टे संरक्षित क्षेत्रों के मुख्य या बफर क्षेत्रों में नहीं आते हैं, लेकिन फेन वन्यजीव अभयारण्य, कान्हा टाइगर रिजर्व और कान्हा-अचानकमार गलियारे के निकट होने के कारण पारिस्थितिक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं.

खनन पट्टे का किया निरीक्षण

बीते अक्टूबर महीने में 266.3 हेक्टेयर राजस्व भूमि में फैली एएए रिसोर्स लिमिटेड की चूना पत्थर खदान पट्टे का निरीक्षण केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, भारतीय वन्यजीव संस्थान और मध्य प्रदेश वन विभाग की एक समिति द्वारा किया गया था.

यह नोट किया गया था कि खनन पट्टे के कुछ हिस्से एक रेखांकित किए बाघ गलियारे में आते थे और इसके दक्षिणी भाग में बाघों आने-जाने के लिए व्यवहार्य मार्ग के साथ एक सन्निहित वन क्षेत्र था. साइट का दौरा करने वाली समिति ने परियोजना की सिफारिश करते हुए कहा कि खनन गतिविधियों को प्रतिबंधित करके दक्षिणी गलियारे के माध्यम से बाघों की आवाजाही सुनिश्चित और मजबूत की जानी चाहिए.

उत्तराखंड में रोपवे परियोजना

वहीं उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क रोपवे परियोजना पर विचार-विमर्श के दौरान राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन ने इस आधार पर प्रस्ताव को उचित ठहराया कि इससे कांवड़ यात्रा के मौसम के दौरान भीड़ कम हो जाएगी और तीर्थयात्रियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले सड़क मार्ग पर वाहनों का यातायात कम हो जाएगा, जो वन क्षेत्र से होकर गुजरता है.

विशेषज्ञ गैर सरकारी सदस्य रमन सुकुमार ने कहा कि पारिस्थितिक दृष्टिकोण से प्रस्ताव पर विचार किया जाना चाहिए. इस परियोजना को इस शर्त के साथ मंजूरी दी गई थी कि उत्तराखंड सरकार को क्षेत्र में जानवरों की आवाजाही का विश्लेषण करने और निर्माण के प्रभाव को कम करने के उपायों की सिफारिश करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के माध्यम से एक अध्ययन कराना चाहिए.

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