Money Laundering Case: सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार (15 दिसंबर) को पत्रकार महेश लांगा को उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत दे दी.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोप पर विचार करने और गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए मामले की सुनवाई रोज़ाना करे. सुप्रीम कोर्ट ने लांगा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सुनवाई में सहयोग करने और कोई स्थगन न लेने का आदेश दिया.
केस के बारे में लिखने से मनाही
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है, ‘याचिकाकर्ता महेश लांगा और उनके वकील को विशेष अदालत को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया जाता है और इस आधार पर कोई स्थगन नहीं मांगा जाएगा या दिया जाएगा कि हाईकोर्ट में अलग से कार्यवाही रद्द करने का मामला लंबित है. यह शर्त इसलिए लगाई गई है, क्योंकि हाईकोर्ट ने ट्रायल की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई है.’
शीर्ष अदालत ने लांगा को ‘अहमदाबाद में स्पेशल जज के सामने उनके खिलाफ चल रहे आरोपों के संबंध में एक अखबार के असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कोई भी लेख प्रकाशित करने या लिखने’ से रोक दिया है.
अब जनवरी में होगी सुनवाई
अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें सभी कानूनी दलीलें, आपत्तियां और बचाव की दलीलें उठाने और विशेष अदालत के सामने अपना केस लड़ने के लिए जिस भी मटेरियल पर वे भरोसा करेंगे, उसे पेश करने की पूरी आज़ादी है. आदेश में कहा गया है, ‘यह साफ किया जाता है कि यह अंतरिम जमानत याचिकाकर्ता के अच्छे आचरण और व्यवहार के आधार पर दी गई है.’
ED को पत्रकार महेश लांगा (Journalist Mahesh Langa) द्वारा जमानत की शर्तों के पालन के संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी, 2026 को तय की है.
क्या है मामला
गुजरात पुलिस ने राजकोट और अहमदाबाद में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST), एंटी इवेजन विभाग के सुपरिटेंडेंट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर FIR दर्ज की थी. दोनों मामलों में आरोप फर्जी तरीकों से GST रजिस्ट्रेशन हासिल करने और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और ट्रांसफर करने से संबंधित हैं.
समाचार वेबसाइट स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक, महेश लांगा के खिलाफ कम से कम 7 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें गुजरात पुलिस द्वारा 5 एफआईआर और ईडी द्वारा 2 मामले शामिल हैं. लांगा को सबसे पहले 7 अक्टूबर 2024 को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने कथित GST से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था.
गोपनीय दस्तावेज रखने का आरोप
पुलिस ने आरोप लगाया कि ध्रुवी एंटरप्राइज नाम की एक कंपनी ने एक ही पैन कार्ड से छह फर्में बनाकर धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया. FIR में जिन कंपनियों का नाम है, उनमें से एक DA एंटरप्राइज है.
22 अक्टूबर 2024 को पुलिस ने लांगा के खिलाफ गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के गोपनीय दस्तावेज रखने के आरोप में दूसरा मामला दर्ज किया. ये दस्तावेज पहले मामले में गिरफ्तारी के दौरान उनसे बरामद किए गए थे.
कई केस हैं दर्ज
29 अक्टूबर 2024 को लांगा पर अहमदाबाद के एक कारोबारी को धोखा देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया. उसी दिन ईडी के अहमदाबाद जोनल ऑफिस ने घोषणा की कि उसने लांगा और अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है.
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, बीते जुलाई महीने में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद पत्रकार महेश लांगा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
जनवरी में गुजरात पुलिस ने लांगा के खिलाफ एक रियल एस्टेट एजेंट से उसकी छवि खराब करने और उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर 40 लाख रुपये वसूलने के आरोप में मामला दर्ज किया था.




