गुजरात सरकार ने बीते दिनों विधानसभा को बताया कि पिछले दो सालों में गुजरात में कुल 322 एशियाई शेरों की मौत हुई है, जिनमें 166 वयस्क शेर और 156 शावक शामिल हैं. इनमें से 64 शेरों की मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुईं.
प्रश्नकाल के दौरान बीते 27 फरवरी को कांग्रेस विधायक शैलेश परमार के एक सवाल का जवाब देते हुए गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि 1 जनवरी 2024 और 31 दिसंबर 2025 के बीच 313 एशियाई शेरों की मौत हुई और इस साल जनवरी में 9 और मौतें हुईं.
मंत्री ने अपने लिखित जवाब में कहा, ‘2024 में कुल 165 शेरों की मौत हुई और 2025 में 148 और शेरों की मौत हुई.’
2025 में हुई थी गिनती
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के शेरों की गिनती के मुताबिक, गिर वन्यजीव अभयारण्य और उसके आसपास के इलाकों में 891 एशियाई शेर हैं, जिनमें 255 शेर, 405 शेरनियां और 231 बच्चे हैं.
25 महीनों में दर्ज 322 मौतों में से 64 अप्राकृतिक कारणों से हुईं. 17 शेर, 24 शेरनियां, 22 शावक और एक अज्ञात शेर अप्राकृतिक कारणों से मारे गए. 2023 और 2024 में कुल 286 शेरों की मौत हुई थी.
मंत्री ने कहा कि सरकार ने अप्राकृतिक मौतों को रोकने और बचाव की कोशिशों को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें अलग-अलग जगहों पर जंगली जानवरों के लिए इलाज की व्यवस्था करना, जानवरों के डॉक्टर तैनात करना और समय पर मेडिकल मदद पक्का करने के लिए एम्बुलेंस सेवा शुरू करना शामिल है.
क्या इंतजाम किए गए
जवाब में बताए गए और कदमों में अभयारण्य क्षेत्र से गुज़रने वाली सड़कों पर स्पीड-ब्रेकर और साइनबोर्ड लगाना, जंगलों में रोज़ाना पैदल पेट्रोलिंग करना, जंगल क्षेत्र के पास खुले कुओं के चारों ओर दीवारें बनाना और गिर वन्यजीव अभयारण्य के पास रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाना शामिल है.
मोढवाडिया ने विधानसभा को यह भी बताया कि एशियाई शेरों को रेडियो-कॉलर लगाया गया है और सासन में एक हाई-टेक मॉनिटरिंग यूनिट बनाई गई है.
मौत की दर
रिपोर्ट के अनुसार, नाम न बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा कि 891 शेरों की आधिकारिक आबादी के साथ हर साल लगभग 135 शेरों की मौत आबादी का लगभग 15% है, जो ठीक माना जाता है.
हालांकि, गुजरात में एशियाई शेरों की मौत की दर लगभग 17% से 18% है, उन्होंने कहा कि शेरों की असल आबादी बताए गए आंकड़े से ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि वन विभाग पारंपरिक रूप से अपने अनुमानों में रुढ़िवादी रहा है.
जांच की ज़रूरत
एक अन्य वन्यजीव विशेषज्ञ ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि आम तौर पर शावकों की मौत की दर वयस्क शेरों की मौत की दर से ज़्यादा होती है. इसकी वजह है कैनिबलिज़्म (बच्चों का मारकर खा जाना) और पहले तीन सालों में उनके जीवित रहने की कम दर, जो लगभग 40% होती है.
विशेषज्ञ ने कहा, ‘हालांकि पिछले चार सालों में वयस्क शेरों की मौत की संख्या शावकों की तुलना में ज़्यादा रही है.’ 2023-24 में पहले बताई गई 286 मौतों में से 143 वयस्क और 143 शावक थे.
विशेषज्ञ ने कहा कि वयस्क शेरों की मौतों की ज़्यादा संख्या की वजह से और जांच की ज़रूरत है. उन्होंने सलाह दी कि किसी बीमारी का फैलना इसकी एक संभावित वजह हो सकती है.




